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गाय के गोबर के कंडे पर घी की दो आहुतियों से 12 घंटे तक “सैनिटाइज” रहता है घर : संस्कृति मंत्री

ਗਾਂ ਦੇ ਗੋਹੇ ਦੀ ਧੂਣੀ ‘ਤੇ ਦੋ ਚਮਚੇ ਦੇਸੀ ਘਿਓ ਦੇ ਪਾ ਕੇ ਘਰ ‘ਚ ਘੁਮਾਓ, 12 ਘੰਟੇ ਲਈ ਘਰ ਸੈਨੇਟਾਈਜ਼ ਹੋ ਜਾਂਦਾ।
ਇਹ ਭਾਜਪਾ ਦੀ ਇਸ ਮੰਤਰੀ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ।

इंदौर: मध्यप्रदेश की संस्कृति और अध्यात्म मंत्री उषा ठाकुर (Usha Thakur) ने Covid-19 से बचाव के लिए वैदिक जीवन पद्धति अपनाए जाने पर जोर दिया. उन्होंने यह दावा भी किया कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय गाय के गोबर के कंडे पर हवन के दौरान गो-घी की महज दो आहुतियों से कोई भी घर 12 घंटे तक संक्रमणमुक्त रह सकता है. ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में कहा, “कोविड-19 के प्रकोप से निपटने में एलोपैथी के साथ ही वैदिक दिनचर्या की भी अपनी भूमिका है. महामारी के संकट ने हम सबको समझा दिया है कि हमें वैदिक जीवन पद्धति के मार्ग पर लौटना होगा.”

उन्होंने घर को “संक्रमणमुक्त” रखने के लिए एक नुस्खा भी सुझाया. ठाकुर ने कहा, “आप गाय के दूध से बने घी में अक्षत (पूजा में प्रयोग होने वाले साबुत चावल) मिलाकर रखें. अगर आप सूर्योदय और सूर्यास्त के वक्त गाय के ही गोबर के कंडे पर हवन के दौरान इस घी की दो आहुतियां डालें, तो आप यकीन मानिए कि आपका घर 12 घंटे तक सैनिटाइज (संक्रमणमुक्त) रहने वाला है.” ठाकुर (55) ने कहा कि लोगों को उनकी बातें “अजीब” लग सकती हैं, लेकिन घर को संक्रमणमुक्त रखने का यह नुस्खा मनगढ़ंत नहीं है. उन्होंने कहा, “यह विज्ञान है कि भगवान सूर्य जब आकाश पर उदित या अस्त होते हैं, तो (धरती की) गुरुत्वाकर्षण शक्ति 20 गुना तक बढ़ जाती है. शाम को (वायुमंडल में) ऑक्सीजन कम होती है, इस समय यदि हमें ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा चाहिए, तो घी की ये दो आहुतियां इस प्रचुरता को सम्पूर्ण पर्यावरण में व्याप्त कर देती हैं.”

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि वर्ष 2022 में मनाई जाने वाली भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और इस उपलक्ष्य में घरों के मुख्य बैठक कक्ष में उन शहीद क्रांतिकारियों की तस्वीरें अवश्य लगाई जानी चाहिए जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सर्वोच्च बलिदान देकर देश को अंग्रेजी गुलामी से मुक्त कराया था. शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में शामिल ठाकुर के पास संस्कृति और अध्यात्म विभाग के साथ ही पर्यटन महकमा भी है. उन्होंने कहा, “मैं देखती हूं कि हमारे घरों से असली नायक गायब हैं. आप यदि फिल्मी कलाकारों को हीरो की संज्ञा देते हैं, तो माफ कीजिएगा, मैं कहूंगी कि यह परिभाषा गलत है.”

मंत्री ने कहा, “फिल्मी कलाकार तो निर्माता-निर्देशक के आदेश पर चलते हैं. अगर उन्हें किसी फिल्म में चोर-डाकू की भूमिका निभाने के लिए फीस मिलेगी, तो वे चोर-डाकू भी बन जाएंगे. वे बेहतर कलाकार हो सकते हैं. लेकिन आपके और हमारे नायक नहीं हो सकते.” ठाकुर ने इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महिला वर्ग की उन पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जिन्होंने कोविड-19 के संकट के दौरान लगातार मैदानी दायित्व संभाला तथा आम लोगों की हर मुमकिन मदद की.

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