Home / Hindi / गौशालाओं में दान देना बंद करें !- मनोज दूहन

गौशालाओं में दान देना बंद करें !- मनोज दूहन

गौ के मुद्दे पर शहरी हिन्दू , जमींदार (किसान) जातियों को भावुकता में बनाये रखते हैं, जिससे जमींदारों के बच्चे गौ रक्षक दल बनाकर रात रात भर गौवों की चौकीदारी करते हैं और अगर इन्हें कोई गौकशी के लिए जा रही गौवों से भरा ट्रक फंस जाए तो ये उस ट्रक ड्राइवर के साथ झगड़ा मारपीट करके खुद पर केस बंधवा बैठते हैं, जिससे इनका कैरियर खराब हो जाता है, जबकि दूसरी तरफ मंडी-फंडि जातियों के बच्चे रात रात भर पढ़ाई करके अपना कैरियर संवारते हैं और प्रसाशनिक सेवाओं में भर्ती होकर हम पर राज करते हैं।

हकीकत तो यह है कि जिन गौवों के नाम पर शहरी हिन्दू हमको भावुक करते हैं, उसी गौ मांस का दुनिया का दूसरे नम्बर का निर्यातक देश भारत है, जिसकी दुनिया के गौ मांस निर्यात में 13.14 प्रतिशत की भागीदारी है, जोकि ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के बराबर है।

आज केंद्र में न तो मुसलमानों की सरकार है, न ही ईसाइयों की सरकार है बल्कि केंद्र में पूर्ण बहुमत की हिन्दू आरएसएस की सरकार है।

गौ मांस के निर्यात के आंकड़ों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्तमान सरकार के पूर्वज वेदों के ऋषि मुनि भी गौमांस का भक्षण किया करते थे, जिनके नक्शे कदम पर आज इनकी औलादें चल रही हैं।

अतः जमींदारों के बच्चों को गौ के नाम पर भावुक होने की जरूरत नहीं है और न ही गौशालाओं में दान देने की जरूरत है, क्योंकि ये गौशालायें केवल मात्र एक्सपोर्ट के लिये तैयार किये जाने वाले गौ मांस का स्टोर हाउस ही हैं, जिन्हें गौ सेवा के नाम पर जारी रखा जाता है। इनमें पलने वाली गौवों को जमींदार किसानों के पैसे से फ्री में गौ-मांस निर्यातकों के लिये पाला जाता है।

जमींदार किसानों को चाहिये कि अपनी अपनी शैक्षणिक संस्थाओं को मजबूत करें अथवा किसी गरीब बच्चे को पढ़ा दें; गौशालाओं में दान देना तो अधर्म ही है।

– मनोज दूहन

About admin

%d bloggers like this: